New Income Tax Act 2025 केंद्र सरकार ने आयकर और कानून को लेकर एक बहुत ही बड़ा और अहम बदलाव करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए इन नए प्रावधानों का मकसद टैक्स से जुड़ी प्रणाली को पहले से ज्यादा सरल, पारदर्शी और करदाताओं के लिए उपयोगी बनाना है। सरकार का साफ कहना है कि टैक्स कानून का उद्देश्य लोगों को डराना या छोटी-छोटी अनजानी गलतियों पर जेल भेजना नहीं है।

बल्कि सही तरीके से टैक्स वसूली करना और स्वेच्छा से अनुपालन को बढ़ावा देना है। इसी सोच के साथ नए इनकम टैक्स एक्ट में कई नए नियम जोड़े गए हैं। इन नियमों के लागू होने से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो लंबे समय से मुकदमेबाजी, भारी जुर्माने और जेल जैसी समस्याओं का सामना कर रहे थे।(Photo: Pixabay)
New Income Tax Act 2025 में क्या बदलेगा??
मिडिल क्लास के लोगों को बजट से पहले इनकम टैक्स में बड़ी छूट की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद सरकार ने साफ कर दिया कि इनकम टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा और नियमों की जटिलता के कारण होने वाली अनजानी व तकनीकी गलतियों पर सख्ती कम की जाएगी। आमतौर पर ऐसे मामलों में बड़ी राहत दी जाएगी, जहां गलती जानबूझकर नहीं बल्कि कानून की पेचीदगी, सिस्टम की तकनीकी समस्या या जानकारी के अभाव के कारण हुई हो।
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में जानकारी दी है कि नया इनकम टैक्स एक्ट 2025, 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा। यह नया कानून मौजूदा आयकर अधिनियम की जगह लेगा और इसमें कई पुराने व जटिल नियमों को सरल प्रक्रिया में बदला गया है। सरकार का मानना है कि जब नियम आसान होंगे तो टैक्सपेयर्स खुद आगे आकर उनका पालन करेंगे, जिससे विवादों की संख्या अपने आप कम हो जाएगी।
NRI और Foreign Asset Rules में बड़ी राहत
नए इनकम टैक्स एक्ट में खास तौर पर एनआरआई से जुड़े नियमों को सरल बनाया गया है। अब भारत में प्रॉपर्टी बेचने वाले एनआरआई को टीडीएस के लिए अलग-अलग TAN लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पहले यह प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली थी, जिससे एनआरआई को बार-बार विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नए नियमों के अनुसार अब प्रॉपर्टी खरीदने वाला व्यक्ति ही टीडीएस काटेगा और उसे अपने पैन कार्ड के जरिए जमा करेगा। इससे एनआरआई को प्रशासनिक राहत मिलेगी और लेन-देन की प्रक्रिया तेज होगी।
इसके अलावा सरकार ने विदेशी संपत्ति से जुड़े मामलों में भी राहत देने का फैसला किया है। जिन एनआरआई ने अपनी विदेशी आय का खुलासा कर दिया है और उस पर टैक्स भी चुका दिया है, लेकिन किसी कारणवश पूरी विदेशी संपत्ति घोषित नहीं कर पाए थे, उन्हें अब जेल नहीं जाना पड़ेगा। ऐसे मामलों में केवल जुर्माना भरकर केस का निपटारा किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह है कि छोटे और अनजाने मामलों में लोगों को अपराधी की तरह न देखा जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी एनआरआई की विदेशी अचल संपत्ति की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है और उसका खुलासा नहीं किया गया है, तो उस पर किसी तरह का दंड या कार्रवाई नहीं होगी। 1 अक्टूबर 2024 से ऐसे मामलों में न तो जुर्माना लगाया जा रहा है और न ही अभियोजन किया जाएगा। इसका मकसद उन लोगों को राहत देना है, जिनकी विदेश में छोटी-मोटी संपत्ति है और जो नियमों के अभाव में उसका खुलासा नहीं कर पाए।
Penalty, Appeal और Jail Rules कैसे बदलेंगे
जहां आय या संपत्ति की राशि अधिक है, वहां सरकार ने जुर्माने की स्पष्ट और तय सीमा बना दी है। छुपाई गई संपत्ति पर 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा और इसके अलावा 30 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स भी लगाया जाएगा। यह राशि चुकाने के बाद संबंधित व्यक्ति पर किसी तरह की अन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया, कोर्ट-कचहरी और मुकदमेबाजी में कमी आएगी।
सरकार ने अपील की प्रक्रिया को भी आसान बना दिया है। पहले अपील दाखिल करने के लिए कर राशि का 20 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य था, जिसे अब घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके साथ ही अपील के दौरान जुर्माने की राशि पर कोई ब्याज नहीं लगेगा। इससे करदाताओं को अपनी बात रखने और न्याय पाने का बेहतर मौका मिलेगा।
गंभीर मामलों में भी पहले की तुलना में सजा को कम किया गया है। पहले कुछ मामलों में अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान था, लेकिन नए नियमों के तहत इसे घटाकर अधिकतम 2 साल कर दिया गया है। कई मामलों में अदालत सजा की जगह केवल आर्थिक दंड या जुर्माना लगाने का विकल्प भी चुन सकती है। इससे ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलेगी।
सरकार ने कुछ तकनीकी और प्रक्रियात्मक गलतियों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फैसला किया है। जैसे ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा न होना, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट में देरी या टीडीएस से जुड़ी तकनीकी भूल। ऐसे मामलों में जेल या भारी जुर्माने की जगह केवल मामूली शुल्क लिया जाएगा। इससे साफ है कि सरकार टैक्स सिस्टम को डिक्रिमिनलाइजेशन की दिशा में आगे बढ़ा रही है।
ये सभी बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और नए इनकम टैक्स एक्ट का हिस्सा होंगे। सरकार का दावा है कि इससे इनकम टैक्स सिस्टम पहले से ज्यादा सरल, उपयोगी और डर-मुक्त बनेगा, जिससे आम करदाताओं को बेवजह होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी।
निष्कर्ष (Conclusion)
देखा जाए तो कुल मिलाकर नया इनकम टैक्स एक्ट सरकार की उसे सोच को बताता है। जिसमें ईमानदार कर दाताओं को डराने की बजाय उन्हें सहयोग देना प्राथमिकता है